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नाईंस के बारे में

नाईंस के बारे में

इतिहास

नाभिकीय ईंधन सम्मिश्र (नाईंस) की स्थापना वर्ष 1971 में की गई थी, यह भारत सरकार, परमाणु ऊर्जा विभाग की बड़ी औद्योगिक स्थापना है। सम्मिश्र भारत में प्रचालित सभी परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों के लिए नाभिकीय ईंधन बण्डल और रिएक्टर कोर घटकों की आपूर्ति के लिए उत्तरदायी है। यह एक अनुपम सुविधा है जहाँ एक ही छत के नीचे कच्चा पदार्थ से प्रारंभ कर प्राकृतिक समृद्ध यूरेनियम ईंधन, ज़र्केलॉय आवरण और रिएक्टर कोर घटक निर्मित किये जाते है।

ईंधन

भारत यूरेनियम की सीमित मात्रा के विशाल स्रोत सांपेक्षत: विवेकपूर्ण रूप से उपयोग हेतु आगे बढ़ा रहा है। इसके अंतर्गत तीन स्तरीय स्वदेशी परमाणु विद्युत कार्यक्रम दाबित भारी पानी रिएक्टर (पीएचडब्ल्यूआर) और द्रव धातु शीतित द्रुत प्रजनक रिएक्टरों (एलएमएफबीआर) के बंद ईंधन चक्र शामिल है। सभी दाबित भारी पानी रिएक्टर,विद्युत कार्यक्रम के पहले चरण के अंतर्गत आते हैं जिनमें आवरण के रूप में ज़र्केलॉय तथा ईंधन के रूप में प्राकृतिक यूरेनियम डाइऑक्साइड का प्रयोग किया जाता है। इसके अतिरिक्त भारत दो क्वथन जल रिएक्टर को सन् 1969 से प्रचालित कर रहा है। इन रिएक्टरों के लिए नाईंस में ही ज़र्केलॉय आवरणयुक्त आयातित समृद्ध यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड से प्रारंभ कर समृद्ध यूरेनियम ऑक्साइड ईंधन अवयवों और समुच्चयों का संविरचन किया जाता है।

यूरेनियम का परिष्करण और परिवर्तन

नाईंस में दाबित भारी पानी रिएक्टर ईंधन के उत्पादन के लिए कच्ची सामग्री मैग्नीशियम डाई यूरेनेट है जो येलो केक के नाम से जाना जाता है। मैग्नीशियम डाई-यूरेनेट का सांद्रण जादूगुड़ा खान से प्राप्त किया जाता है इसकी पिसाई यूरेनियम कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (यूसीआईएल) द्वारा प्रचालित खान पर की जाती है। अशुद्ध मैग्नीशियम डाई यूरेनेट (एमडीयू) को नाइट्रिक अम्ल से विघटित करने के बाद अमोनिया के साथ विलायक निष्कर्षण और अवक्षेपित कर अमोनिया डाई-यूरेनेट प्राप्त किया जाता है। अगले चरणों में नियंत्रित निस्पातन और अपचयन के बाद सिंटरनयोग्य यूरेनियम डाइऑक्साइड चूर्ण तैयार होता है जिसे बेलनाकार गुटिका के रूप में संहत किया जाता है और उच्च घनत्व वाली यूरेनियम डाइऑक्साइड गुटिकाओं को प्राप्त करने के लिए उच्च ताप पर सिंटरित किया जाता है। क्वथन जल रिएक्टरों के लिए समृद्ध यूरेनियम हेक्साफ्लोराइड का तापीय जल अपघटन किया जाता है और उसे अमोनियम डाई-यूरेनेट में परिवर्तित किया जाता है जिससे उच्च घनत्व वाली यूरेनियम डाईऑक्साइड गुटिकाओं को प्राप्त करने के लिए उसी तरह उपचारित किया जाता है जैसे प्राकृतिक अमोनियम डाई-यूरेनेट को किया जाता है।

ज़र्केलॉय का उत्पादन

ज़र्कोनियम धातु के उत्पादन के लिए खनिज स्रोत ज़र्कान (ज़र्कोनियम सिलिकेट) है जो केरल, तमिलनाडु और उड़ीसा के समुद्री तटों के रेतीले निक्षेपों में पाया जाता है और इसकी आपूर्ति भारतीय विरल मृदा लिमिटेड द्वारा की जाती है। ज़र्कान ऑक्साइड प्राप्त करने के लिए ज़र्कान रेत का दाहक संलयन, विलयन, विलायक निष्कर्षण (हैफ्नियम अलग करने के लिए) अवक्षेपण और निस्तापन आदि चरणों में संसाधित किया जाता है। पुन: समजातीय ज़र्कोनियम स्पंज प्राप्त करने के लिए शुद्ध ज़र्कान ऑक्साइड को उच्च तापमान पर क्लोरीनीकरण अभिक्रियात्मक धातु अपघटन और निर्वात आसवन किया जाता है। समजातीय ज़र्केलाय सिल्लियों का निर्माण करने के लिए स्पंज को मिश्रधातु बनाने वाले संघटक के साथ अभिक्रिया की जाती है और निर्वात चाप द्वारा कई बार गलाया जाता है और इसे संधिरहित नलिकाओं, चद्दारों और छड़ों को बहिर्वेंधन, पिल्गरन और परिष्करण प्रचालन द्वारा परिवर्तित किया जाता है।

ईंधन संविरचन

दाबित भारी पानी रिएक्टर ईंधन के लिए यूरेनियम ऑक्साइड की बेलनाकार गुटिकाओं को एकत्रित कर ज़र्कोनियम मिश्रधातु की पतली दीवार वाली नलिकाओं में भरकर दोनों सिरों को ज़र्केलॉय अंत्य प्लगों के साथ प्रतिरोधी वेल्डन द्वारा भलीभांति सील बंद कर दिया जाता है। ऐसी कई ईंधन पिनों के गुच्छों को ईंधन बण्डल के रूप में संविरचित किया जाता है ताकि इसे सरलता से रिएक्टर में भरा जा सके। 220 मेगावॉट के दाबित भारी पानी रिएक्टर और 500 मेगावाट के दाबित भारी पानी रिएक्टरों के लिए तैयार किये जाने वाले ईंधन बण्डलों में क्रमश: 19 और 37 ईंधन पिनों का प्रयोग होता है। दो प्रकार के क्वथन जल रिएक्टरों के लिए 6 x 6 और 7x7 के क्रम में ईंधन समुच्चयों का संविरचन किया जाता है।

संधिरहित नलिकाएँ, एफबीआर उप समुच्चय और विशेष सामग्रियाँ / पदार्थ

नाईंस के जंगरोधी इस्पात नलिका संयंत्र (एसएसटीपी) और विशेष नलिका संयंत्र (एसटीपी) के द्वारा नाभिकीय और गैर-नाभिकीय अनुप्रयोगों, दोनों के लिए विविध प्रकार की जंगरोधी इस्पात और टाइटेनियम संधिरहित नलिकाओं का उत्पादन किया जाता है। नाईंस, प्रचालनरत द्रुत प्रजनक परिक्षण रिएक्टर (एफबीटीआर) और आगामी आदि प्ररूप द्रुत प्रजनक परिक्षण रिएक्टर (पीएफबीआर) के लिए उप-समुच्चयों और सभी प्रकार जंगरोधी इस्पात हार्डवेयर सहित नलिकाओं, छड़ों, चद्दरों और स्प्रिंगों की आपूर्ति कर रहा है। नाईंस का विशेष पदार्थ संयंत्र उच्च मूल्य, कम परिमाण, उच्च शुद्धता वाले विशेष पदार्थों जैसे टैंटलम, नयोबियम, गैलियम, इंडियम आदि का निर्माण इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष और रक्षा क्षेत्रों में अनुप्रयोगों के लिए करता है।

क्रांतिक उपस्कर का संविरचन

नाभिकीय ईंधन सम्मिश्र का उल्लेखनीय पक्ष यह भी है कि आंतरिक प्रक्रम विकास के अलावा भारतीय उद्योग के लिए संयंत्र उपस्करों और स्वचालित प्रणालियों के संविरचन को भी अत्यधिक प्रोत्साहन दिया जाता है। नाईंस के संयंत्रों में आंतरिक रूप से निर्मित भारी परिष्कृत उपस्करों में यूरेनियम के शुद्धीकरण के लिए कर्दम निष्कर्षण प्रणाली, उच्च तापमान ( 1750 डिग्री सेल्शियस) गुटिका सिंटरन भठ्ठी, निर्वात अनीलन भठ्ठी, शीत अपचयन मिल, विभक्त स्पेसर एवं बेयरिंग पैड वेल्डन मशीन, स्वचालित नलिका शोधन केंद्र आदि शामिल हैं। इसके अलावा कई सेवाएँ जैसे निर्वात चाप गलित मिश्रधातुओं का उत्पादन, संधिरहित नलिका बहिर्वेंधन और परिष्करण, उपकरणों का उत्पादन, अविनाशी परीक्षण सेवाएँ इत्यादि का भी कार्य किया जाता है।

अपशिष्ट प्रबंधन, स्वास्थ्य और संरक्षा

बहिस्राव प्रबंधन के कार्यक्रम को विस्तृत संगठित रूप से प्रतिपादित करने के आशय से नाईंस पर्यावरण की रक्षा करने की दिशा में ईमानदारीपूर्वक सावधानी बरतता है। स्वास्थ्य भौतिकी इकाई, संरक्षा अभियांत्रिकी प्रभाग और पर्यावरण व प्रदूषण नियंत्रण समूह रेडियोसक्रिय और रासायनिक निस्सरण को अनुमेय सीमा के अंदर सुनिश्चित करने के लिए सतत निगरानी रखता है। नाईंस परिसर में चारो ओर हरियाली विकसित की गई है जिसकी सिंचाई, उत्पादन संयंत्रों के उपचारित अपशिष्ट जल से की जाती है।

आत्मनिर्भरता

नाभिकीय ईंधन सम्मिश्र स्वदेशी रूप से विकसित प्रक्रिया को उत्पादन स्तर पर सफल प्रचालन तक रुपांतरित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। नाभिकीय ईंधन और कोर घटकों के महत्वपूर्ण क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता का मज़बूत आधार महत्वपूर्ण संपत्ति है जो न केवल परमाणु विद्युत कार्यक्रम की सहायता करने में बल्कि देश के लिए बल्कि बड़ी संख्या में समान और अनुषंगी उद्योगों का विकास करने में भी सहायक है।